Drishyam, ek chudai ki kahani-49

जिंदगी प्यार की दो चार घडी होती है चाहे छोटी भी हो यह उमर बड़ी होती है। कड़ी चुदाई हो तेरी अगर मोहब्बत से आखिरी लम्हें तक वह याद खड़ी होती है।

Drishyam, ek chudai ki kahani-42

लण्ड मेरा यह बेकाबू है तेरी सूरत देखि जब से, चूत से मिलने को पागल है वह खड़ा ही रहता है तब से। कैसे उसको मैं शांत करूँ कैसे उसको मैं मनाऊंगा।