कामिनी की प्यास-1

ये बात उन दिनों की है जब मोबाइल फोन नहीं होते थे, लैंड लाइन फ़ोन भी किसी के घर में होते थे। जून का उमस भरा महीना चल रहा था। सरकारी कालोनी के एक घर में श्रीमती अरोड़ा गर्मी से जूझ रही थी। जून की गरमी और फिर बिजली भी चली गई। गरमी से परेशान श्रीमती अरोड़ा, जिसका पहला नाम कामिनी (बदला हुआ नाम) ने अपनी साड़ी उतार कर एक तरफ फेंक दी और बिस्तर पर बैठकर पंखा झलने लगी।

कामिनी का गुलाबी ब्लाउज पसीने से पूरा भीग चुका था। उसके अगले बटन ऐसे लग रहे थे जैसे वो कामिनी के स्तनों को संभालने का पूरा प्रयास कर रहे थे। फिर भी कामिनी के दूधिया स्तनों की गहराई साफ नजर आ रही थी।

कामिनी ने अपने 40 बसंत पार कर लिये थे। मगर उसने अपना बदन खूब सम्भाल के रखा था। लम्बे बाल, 38 साइज के स्तन, कमर 31, 36 के नितंब। गोरा बदन, पेट अभी भी सपाट था।

उसके परिवार में कौन कौन है हम इसे में बाद में बात करेंगे। फिलहाल हम उसकी गतिविधियों पर चलते हैं।

गर्मी से परेशान कामिनी ने अपना ब्लाउज़ उतारा और फिर अपनी ब्रा उतार दी जिसकी उसे अभी कतई ज़रूरत महसूस नहीं हो रही थी। ब्रा उतरते ही उसके बड़े बड़े स्तन किसी पंछी की तरह कैद से आजाद हो गये। उसके चुचियाँ हल्की बादामी रंगत लिए हुई थी। इस उम्र में भी उसके स्तन कसे हुए थे।

कामिनी बिस्तर के सिहराने में सर टिकाकर लेट गई, तभी बिजली भी आ गई और उस सरकारी कमरे का सरकारी पँखा चर चर करते हुए घूमने लगा। पँखे की हवा उसे अच्छी लग रही थी। उसने आँखे बंद कर ली।

फिर वो जाने क्या सोच रही थी। और उसके हाथ उसके पेटीकोट के ऊपर से उसकी चूत को सहलाने लगे। वो धीरे धीरे चूत को रगड़ रही थी। फिर उसने पेटीकोट का नाडा ढीला किया और अपना एक हाथ अंदर डाल दिया।

दूसरे हाथ से वो अपने स्तनों को बारी बारी से दबा रही थी। उसने आँखे बंद की हुई थी।

फिर थोड़ी देर बाद उसने पेटीकोट और अपनी पेंटी घुटनो तक सरका दी। अब उसकी बालों वाली चूत नंगी हो गई थी।

उसके चूत के बाल भीगे हुए थे पसीने से और हवस से। बालों के बावजूद उसकी चूत गुलाबी हिस्सा दिखाई दे रहा था।

फिर उसने अपनी बीच वाली उँगली चूत में डाली। औऱ अंदर बाहर करने लगी। और कुछ बड़बड़ा रही थी।

कामिनी – आह सतीश आह तू कब आएगा, और मेरे चूत में लन्ड डालेगा।

आह आह, मेरी चूत बहुत प्यासी है आजा। तेरा लन्ड कितना मस्त है। ओह सतीश। मैं तुझे कितना याद कर रही हूँ। तू भी मुझे याद कर रहा।

मुझे तेरा लन्ड चूसना है। आजा ,मेरी प्यासी चूत को अपने पानी से भीगा कर बुझा दे।

कामिनी सतीश का नाम लेकर चूत में उंगली करती रही, फिर उसकी रफ़्तार बढ़ने लगी औऱ मादक सिसकियों की आवाज भी। फिर कुछ देर बाद उसके नंगे बदन में कंपन हुआ।

आह आह चोद मुझे। चोद मुझे, अपना माल मेरी चूत में झाड़ दे। आह सतीश आह।

उसके चेहरे पर मुस्कान आई। उसका कामरस उसकी चूत से बहने लगा। वो ढीली पड़ गई और बिस्तर पर लेट गई।

उसके आधे घण्टे के बाद वो उठी और नहाकर कपड़े पहने। फिर रात के खाने की तैयारी में लग गई। शाम को अपनी ड्यूटी पूरी करके राकेश अरोड़ा (बदला हुआ नाम) घर आये।

रात का खाना खाकर और सब काम निपटा कामिनी बिस्तर पर आई। राकेश पहले से ही बिस्तर पर था। राकेश 46 साल का मोटा आदमी था। जो क्लर्क के पद पर काम करता था।

कामिनी ने नाइटी कुछ लोग मैक्सी भी बोलते हैं पहनी थी। अंदर ब्रा और पेंटी नहीं पहनी थी गर्मी की वजह से।

कामिनी – सतीश का कोई फोन आया।

राकेश- नहीं आया।

कामिनी – अच्छा।

राकेश- कल मैं फ़ोन करता हूँ।

कामिनी- जी ठीक है।

फिर कामिनी बिस्तर पर लेट गई। कमरे में नाइट बल्ब की नीली रोशनी हो रही थी। थोड़ी देर बाद राकेश ने करवट बदली और कामिनी के स्तन दबाने लगा और उसकी गर्दन को चूमने लगा। राकेश केवल अंडरवियर में था। फिर उसकी मैक्सी को ऊपर करके जाँघे मसलने लगा। फिर उसने कुछ देर उसकी चूत को रगड़ा।

फिर उसने मैक्सी को पेट तक ऊपर किया और अपना अंडरवियर नीचे सरका कर कामिनी की चूत में लन्ड डाल दिया। उसके बाद उसने आठ दस धक्के लगाए और अपना लावा चूत में छोड़कर कामिनी के ऊपर ढेर हो गया। फिर थोड़ी देर बाद उतरकर सो गया।

उसे इस बात की परवाह नहीं थी कि कामिनी संतुष्ट हुई या नहीं। कामिनी के लिए अब ये रोज की बात हो गई। उसने अपनी मैक्सी नीचे करी और उस दिन को याद करने लगी जब वो सतीश से पहली बार चुदी थी।

सोचते सोचते उसे नींद आ गई। अगली सुबह राकेश अपने ऑफिस के लिए निकले। फिर लगभग 11 बजे किसी ने दरवाजा खटखटाया। दरवाजे पर संदीप खड़ा था।

उसने पाँव छुए और मामी जी प्रणाम बोला।

कामिनी – अरे संदीप आओ।

संदीप अंदर आया और अपना बैग रखकर कुर्सी पर बैठ गया।

कामिनी उसके लिए पानी ले आई।

सन्दीप- मामी जी कैसे हो आप, मामा जी तो आफिस गए होंगे।

कामिनी बगल वाली कुर्सी में बैठते हुए – हाँ तेरे मामा ऑफिस गए हैं, मैं ठीक हूँ बस दिन में बोर हो जाती हूँ अब तू आ गया तो अच्छा है। और घर मे सब ठीक हैं।

सन्दीप – जी मामी जी सब ठीक हैं।

कामिनी- और अभी गर्मियों की छुट्टियां है।

सतीश-जी, तभी तो यहां आया हूँ

कामिनी – तू टीवी देख मैं खाने की तैयारी करती हूँ।

सन्दीप – जी मामी जी।मैं कुछ मदद करूँ।

कामिनी – अरे नहीं, तू आराम कर।

फिर सन्दीप टीवी देखने लगा, और कामिनी किचन में चली गई।

सन्दीप 19 साल का लड़का है, जैसे आपको पता ही चल गया वो राकेश का भांजा है। सन्दीप का बदन कसरती है। कद भी 5′ 7″ है। रंग साँवला है।

सन्दीप- मामी जी मैं ज़रा नहा लेता हूँ।

कामिनी- हंसते हुए ज़रा क्या पूरा नहा ले।

फिर सन्दीप बाथरूम में नहाने चला गया। कामिनी किचन से बाहर आई तो देखा सन्दीप नहाने चला गया। फिर उसे ध्यान आया कि बाथरूम में टॉवल नहीं है। वो टॉवल लेकर बाथरूम की तरफ गई।

बाथरूम से उसे अजीब से आवाज आ रही थी। उसने कान लगा के सुना तो उसे समझ आया कि सन्दीप हस्त मैथुन कर रहा है।

सन्दीप- आह कामिनी मामी तू कितनी मस्त है। तेरी पेंटी से क्या खुश्बू आ रही है। आह एक बार मुझे मौका मिले तो मैं तुझे चोद दूँ।

ये सुनकर कामिनी सन्न रह गई और उसे याद आया कि उसने सुबह ब्रा पेंटी बाथरूम में ही छोड़ दी। उसका मन करा की वो अभी वहाँ से चली जाए। मग़र फिर भी वो वहीं रुकी रही।

सन्दीप- मामी तेरे दूदू कितने बड़े है, इनको दबाने में कितना मज़ा आएगा। बस एक बार इन्हें मसल लूँ। आह मामी।

कामिनी को भी अपनी चूत में गीलापन महसूस होने लगा था। उसके हाथ अपने आप मैक्सी के ऊपर से चूत पर चले गए थे। उसका मन करा अभी दरवाजा खोल ले अंदर चली जाए। मगर उसने अपनी भावनाओं में काबू कर लिया। इतनी देर में सन्दीप भी अपना माल झाड़ चुका था।

कामिनी दबे पाँव वापस चली आई। उसके कानों में सन्दीप की आवज गूंज रही थी। इतने में सन्दीप की आवज आई

मामी टॉवल देना।

फिर वो टॉवल देने गई। फिर उसके बाद कुछ नहीं हुआ। कामिनी सन्दीप को देखते तो मन मे उसके लन्ड की कल्पना करने लगती। फिर ऐसे ही शाम हो गई, राकेश भी आफिस से आ गया। फिर वो भी सन्दीप के आने से खुश हो गए। फिर राकेश नहाने चला गया। कामिनी किचन में बचा हुआ काम करने चली गई।

फिर सबने डिनर किया। राकेश और कामिनी अपने बेडरूम में आ गए। आज राकेश ने कुछ नहीं किया। वो जल्दी सो गया। कामिनी के मन मे सन्दीप के लन्ड के ख्याल चल रहे थे। नींद कोसों दूर भाग गई थी। उसे प्यास लगी। आज वो बेडरूम में पानी लाना भी भूल गई थी। वो उठी और बाहर गई, उसने देखा सन्दीप के रूम की लाइट जल रही थी। उसने दरवाजे को हल्का धक्का दिया दरवाजा अंदर से खुला था। उसने देखा सन्दीप सो गया था।

उसने केवल अंडरवियर पहना था। कामिनी उसको देखती रह गई। अंडरवियर उसे उसके लन्ड का उभार साफ दिख रहा था। उसका मन कर रहा था। वो अभी उसका अंडरवियर उतारकर उसके लन्ड को हाथों से सहलाये।

मग़र नैतिकता उसे अपने पर काबू रखने के लिए मजबूर कर रही थी। वो सन्दीप को देखकर अपनी चूत सहला रही थी। वो अपने होंठों को काट रही थी। उसने ऐसे ही अपनी चूत का पानी निकाल दिया। उसकी पैंटी पूरी गीली हो गई थी। जब उसकी काम वासना थोड़ी शान्त हुई तो उसे होश आया कि वो क्या कर रही है। उसने सकपका के कमरे की लाइट बन्द करी और धीरे से कमरे का दरवाजा ढक कर किचन में पानी लेने चली गई।

इधर उसके जाने के बाद सन्दीप आँखे खोलकर मुस्करा रहा था।

जारी रहेगी …

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