नये साल के दिन मैंने छोटी बहन काव्या की जबरदस्त गांड मारी-2 (Naye saal ke din maine chhoti behan Kavya ki zabardast gaand maari-2)

पिछला भाग पढ़े:- नये साल के दिन मैंने छोटी बहन काव्या की जबरदस्त गांड मारी-1

मैंने भी अब बिना देर किए अपने लंड को काव्या की चूत पे सेट करके एक झटके में 2 इंच पेल दिया। वो उम्म्म्मम्म उहह एह उम्मह आहह ओह करके सिसकारियां लेने लगी। तभी मैंने फिर एक जोर का झटका मारा और लंड चूत में हचाक से पेल दिया तो उसकी आंखो से आंसू निकल गए, और वो रोने लगी बिलखने लगी। चूंकि चूत एक साल बाद चुद रही थी, तो मोटे लंड के साथ फैलती चली गई, और साथ ही दर्द के मारे काव्या की आंखें भी फ़ैल गई।

एक बार तो उसे ऐसा महसूस हुआ, जैसे आज ही उसकी सुहागरात हो और उसका पति उसकी चूत की सील खोल रहा था।

वो दर्द से कराही- अह्ह्ह उईई ओह्ह्ह मां धीरे डाल कमीने, फाड़ेगा क्या?

दर्द में वो चिल्ला उठी, पर मैंने बेरहमी से दूसरा धक्का लगा कर पूरा लंड काव्या की चूत में पेल दिया। “हाय्य्य य्य्य मरर गईई ईईई उईई याईईई आईईईई” काव्या दर्द से तड़प उठी। “बहनचोद कुत्ते, रंडी की चूत नहीं है, तेरी बहन की चूत है”।

पर मैं उसकी बातों को सुन कर और मदहोश हो गया और मेरी स्पीड बढ़ गयी। इसकी वजह से मेरा लंड सटर सटर फटर फटर चटर चटर की आवाज़ करता हुआ काव्या की चूत को चोदता रहा था। फिर कुछ ही देर में काव्या को भी मजा आने लगा, और वो भी मेरा साथ देने लगी, और बड़बड़ाने लगी।

काव्या: कमीने, चोद दे रे ओह येह ओह येस चोद अपनी बहन की चूत। बहुत प्यासी है तेरी बहन। मिटा दे उसकी प्यास। क्या मस्त लंड है तेरा, मजा आ गया आह्ह्ह। चोद मेरे राजा चोद, जोर-जोर से चोद!

काव्या मस्ती में बड़बड़ाती जा रही थी।

मैं: ओह्ह मेरी रानी तू क्यों तड़पती रही इतने दिन? मुझे बताया क्यों नहीं? क्या चूत है तुम्हारी। तुम्हें तो मैं दिन-रात चोदना चाहूँगा। एक पल के लिए भी तड़पने नहीं दूंगा।

काव्या: उम्म्मम्म, चोद मेरे राजा। आज से ये चूत मेरे भाई के लिए तोहफा। जब चाहे चोद लेना। क्योंकि इसमें तेरी बहन को ऐतराज नहीं होगा। अब तो जब भी दिल करेगा खूब चुदवाया करुंगी। प्यासी नहीं रहना है अब मुझे।

काव्या: ससहहहह बड़ा तगड़ा लंड हो गया है रे तेरा। तूने तो मेरी बुर को फैला ही दिया। बस भाई अब तू अपने लंड को यूं ही मेरी बुर में अंदर बाहर करके चोद। चोद मेरे राजा।

काव्या की बातें सुन कर मेरा जोश बढ़ गया, और जैसे काव्या बोली थी ठीक वैसे ही मैंने अपने लंड को बाहर की तरफ खींचा, और फिर से एक जबरदस्त करारा धक्का बुर के अंदर लगाया। ल़ंड फिर से सब कुछ चीरता हुआ वापस काव्या की बच्चेदानी से टकराया और फिर से काव्या के मुंह से सिसकारी के साथ उसकी आह निकल गई।

काव्या की आह सुन कर मुझे बहुत ज्यादा आनंद प्राप्त हो रहा था। मैं पसीने-पसीने हो गया था। बुर की गरमी लंड से होते हुए मेरे पूरे बदन को तपा रही थी। इस सर्दी में भी मैं अपने आप को संभाल नहीं पा रहा था। मुझे ऐसा लगने लगा था कि बुर की गर्मी में कहीं मेरा लंड तप कर गल ना जाए और फिर मैंने दोबारा चूत में करारा धक्का मार दिया।

काव्या: बस राजा, इसी तरह से चोद मुझे। फाड़ दे मेरी बुर को। समा जा मेरी बुर में। जैसे तेरा मन करता है वैसे मुझे चोद। मेरी प्यास बुझा दे। खुजली मिटा दे मेरी बुर की।

काव्या के मुंह से इतनी गंदी बातें सुन कर मेरे बदन में नशा सा होने लगा था। जोश दुगना हो चला था, और फिर से मैंने अपने लंड को बाहर की तरफ खींचा और वापस अंदर की तरफ ठूंस दिया। अब मेरा लंड काव्या की बुर में अंदर-बाहर होने लगा था। मैं अपने लंड को अंदर-बाहर करते हुए काव्या को जबरदस्त धक्कों के साथ चोद रहा था।

कुछ ही देर में मेरी सिसकारी छूटने लगी। काव्या कुछ ज्यादा ही प्रसन्न नजर आ रही थी जबरदस्त चुदाई के कारण। उसका चेहरा तमतमा गया था। दूसरी बार काव्या को चुदाई का असली मजा मिल रहा था।

मेरा लंड सटा सट बुर के अंदर-बाहर हो रहा था। मुझे तो अभी भी यकीन नहीं हो रहा था कि मैं नये साल पर अपनी जवान बहन को चोद रहा था। इतनी जल्दी मुझे फिर से ये शुभ अवसर मिलेगा, यह सच में मेरे लिए यकीन के बाहर था। कुछ ही देर मे बुर से फच्च फच्च की आवाज आने लगी। लेकिन यह आवाज पूरे कमरे एक मधुर संगीत की तरह बजने लगी।

कमरे का पूरा वातावरण संगीतमय हो गया था। मेरा हर धक्का जबरदस्त पड़ रहा था। हर धक्के के साथ पूरा बेड हचमचा जा रहा था। वाकई में मेरे लंड का प्रहार काव्या की बुर मे इतना तेज हो रहा था कि खुद काव्या भी आगे की तरफ सरक जा रही थी।

तभी चोदते हुए मेरी नजर उसकी बड़ी-बड़ी पपीते जैसी चूचियों पर फिर से पड़ी, जो मेरे हर धक्के के साथ आगे-पीछे इधर-उधर हिलोरे खा रही थी, और हमारी जोरदार चुदाई की गवाही दे रही थी।

मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने अपनी दोनों हथेलियों को बहन के दोनों पपीतों पर रख दिया। चूचियों पर हथेली पड़ते ही मैं पूरी तरह से गनगना गया। मेरे बदन में इतना ज्यादा जोश बढ़ गया, कि मैं जोर-जोर से चूचियों को मसलने लगा। इससे काव्या का मजा दुगुना हो गया, और वो मुझे अपने पास खींचने लगी और बोल रही थी-

काव्या: आज मुझे चोद डालो मेरे राजा। आज मम्मी पापा नहीं हैं। आज मुझे तुम अपनी रखैल समझ कर चोद डालो। मेरी पूरी गर्मी निकाल दो। मुझे हर पोजीशन में चोदो।

इसी तरह बड़बड़ाते हुए काव्या अपनी गोरी गोरी मांसल जांघों को फैला कर मेरे लंड को बड़ी तेजी से अपनी बुर के अंदर-बाहर ले रही थी।

काव्या: आहहह ओर जोर सेममम। ओह मेरे राजा चोद मुझे आहहहहह।

और थोड़ी ही देर मे काव्या ने मुझ को अपनी बाहों में कस के भींच लिया, और सिसकारी भरते हुए अपने मदन रस की पिचकारी छोड़ दी। मैंने भी कुछ ही देर में अपने लंड की पिचकारी काव्या की बुर में छोड़ दी, और बहन के ऊपर ही ढह गया।

मैं अपने गर्म पानी का बौछार काव्या की बुर में करके निढाल होकर उसके ऊपर पड़ा था। हम दोनों हांफ रहे थे। काव्या तो अभी भी मुझको अपनी बाहों में कसी हुई थी।

मेरा सीना बड़ी-बड़ी चूचियां वाली छातियों से दबा हुआ था, जिसकी निकोली निप्पलें सुई की तरह चुभ रही थी। फिर कुछ ही देर में मैं फिर से तैयार हो गया और काव्या को उल्टा लेटने को बोला। तो वो समझ गयी। पर आज वो भी गांड मरवाने के लिए तैयार थी।

मैं जब काव्या के पीछे आया, तो पीछे से उसकी गदराई हुई और उभरी हुई गांड और भी ज्यादा बड़ी लग रही थी। यह देख कर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने अपनी दोनों हथेलियों को उसके बड़े-बड़े खरबूजों पर रख कर दबाने लगा।

मेरा लंड एक-दम टाइट खड़ा था इसलिए उसका सुपाड़ा काव्या की गांड की दरार के इर्द-गिर्द रगड़ खा रहा था। जिससे काव्या और भी ज्यादा चुदासी हुई जा रही थी। फिर काव्या से रहा नहीं गया, और वो खुद अपना हांथ पीछे ले जाकर मेरे लंड को थामी, और मेरे लंड के सुपाड़े को गांड के छेंद पर टिका कर मुझको धक्का लगाने के लिए बोली। मैं तो पहले से ही उतावला था, और फिर काव्या भी अपनी कमर को पीछे की तरफ धक्का लगायी, तो मेरा लंड फिसल गया, और अचानक से पहले से ही पनियायी बुर में घुसता चला गया।

इस पोजीशन में उसे ज्यादा दर्द का एहसास हुआ। पर मैंने फिर से लंड निकाला और काव्या की गांड के छेद को थोड़ा सा फैला कर लंड सेट करके हल्का सा दबाया, तो लंड का सुपाड़ा अन्दर घुस गया। तो उसकी चीख हल्की सी निकली। पर मैंने अपने लंड को थोड़ा और दबाया तो लंड हल्का और घुसा, और उसकी चीख बहुत तेज हो रही थी।

मुझे लगा कि अगर मैंने इसे रोका नहीं तो बगल वाले अंकल आंटी समझ जाएंगे कि हम दोनों कुछ तो कांड कर रहे थे। और अगर वो आ गए, तो बदनामी बहुत होगी। तभी मैंने काव्या के मुंह पर अपना हाथ रख कर उसकी आवाज को धीरे किया, और फिर सटासट सटासट फिर से लंड काव्या की गांड में पेलने लगा।

इस पोजीशन में मुझे और भी मजे आने लगे थे। क्योंकि मेरी पकड़ और जबरदस्त हो चुकी थी और मैं जब भी लंड को बाहर की ओर खींचता, तो काव्या की गांड की चमड़ी मेरे लंड से चिपक कर बाहर आ जाती, और फिर लंड के अन्दर जाते ही वो भी अन्दर चली जाती। वो नजारा मैं देख बहुत खुश हो रहा था‌। ऐसा लग रहा था कि काव्या की गांड मेरे ही लंड के लिए ही बनी थी।

कुछ ही देर में मैंने अपने धक्के लगाने की स्पीड बढ़ा दी। दर्द की वजह से काव्या का मुंह खुला का खुला रहता और उसके मुंह हे आहहहहह उम्ममम प्लीज फक मी हार्डली प्लीज ओहहहह अइइईईईउउउह आआआआहहहहह करके सिसकारियां लेने लगी। काव्या की गरम सिस्कारियों से फिर से पूरा कमरा गूंज उठा। जांघो से जांघ टकरा रही थी, जिसकी ठप ठप ठप ठप चट चटा चट फटा फट फटा फट की आवाज तथा बेड के हुचुर-हुचुर की आवाज से कमरे का पूरा माहोल मादक हो गया था। मैं तो बिना रुके ही अपना मूसल जैसा लंड काव्या की गांड मे पेले जा रहा था।

हम दोनों चुदाई का मजा लूट रहे थे। कभी कभी धक्के इतने तेज लग जा रहे थे कि काव्या आगे की तरफ सरक जा रही थी। लेकिन मैं उसकी कमर को थाम कर धक्के लगाते हुए चोद रहा था। करीब बीस मिनट की घमासान चुदाई के बाद हम दोनों की सांसे तेज चलने लगी, ओर कुछ ही धक्कों में दोनों अपना कामरस बहाते हुए हांफने लगे।

फिर हम एक-दूसरे को पकड़ कर चिपक गए, और कुछ देर बाद हम दोनों एक दूसरे के जिस्म को सहलाने लगे। कुछ देर बाद हम दोनों ने दूध गर्म करके दूध पिया, और फिर नंगे ही एक-दूसरे को पकड़ कर सो गए। फिर रात को 3 बजे मेरी नींद खुली तो मैंने फिर से काव्या को जगाया, और फिर हम दोनों चुदाई किए। ऐसे ही हम दोनों 3 जनवरी तक खूब चुदाई किए, और फिर वो 5 जनवरी को एग्जाम देकर आई तो पेपर उतना अच्छा नहीं हुआ था, पर पास हो जायेगी, ऐसा काव्या ने बोला।

फिर शाम को पापा का फोन आया कि हम दोनो 8 जनवरी को आएंगे। तो हम दोनों ने खूब चुदाई किया। काव्या की चूत फूल कर डब्बा हो चुकी थी, और गांड का छेद बड़ा हो गया था। फिर मां-पापा घर आ गए, पर उन्हें पता नहीं चल पाया कि हम दोनों ने चुदाई की, और ये बात हम दोनों ने सीक्रेट रखी।

पर अब काव्या का शरीर भारी भरकम होने लगा था। उसका फिगर साईज बदलने लगा था, और अब तो मोहल्ले के मनचले लड़के और भी भद्दे-भद्दे कमेंट करने लगे थे कि, “कोई तो इसकी बजा रहा है। अरे मैडम हमें भी मौका दो”, और ऐसे दिन बीतते गए। फिर काव्या का कालेज खत्म हुआ तो वो बीएड करने के लिए दूसरे कालेज में एडमिशन ली। उसके बाद क्या हुआ, क्या कोई लड़का उसे पटा पाएगा?

कमेंट करके बताइएगा कहानी कैसी लगी

धन्यवाद !