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कहानी मेरे परिवार में हुए संभोग की-6

पिछली कहानी में आपने देखा कि मैंने अपनी मां को कैसे ना बोलते हुए भी मना लिया और उनको रात भर 5 बजे तक बे-दम चोदा था।

सुबह हुई और मां मुझे उठाने आई और मैंने उसे पकड़ लिया था।

इतने में चाची बाहर हाल में बैठी थी।

अब आगे की कहानी:-

मैं और मेरी मां हम सेक्सी बातें कर रहे थे। इतने में चाची कब हाल में आई हमें पता ही नहीं चला।

बाहर से चाची ने आवाज लगाई: मीनाक्षी दीदी।

तब मैं और मां ने एक दूसरे का हाथ छोड़ा और मां बाहर चली गई। हम दोनों को लग रहा था कहीं उन्होंने हमारी बाते तो नहीं सुनी होगी।

फिर मां बाहर जाके चाची से पूछती है: तू कब आई?

चाची: मैं बस अभी ही आई हूं।

मां: अच्छा आजा बैठ।

मां बिना बोले समझ गई और किचन में चली गई। वो वहां से उनके लिए फिर से खीरा लेकर आई, और उसे दे दिया।

मैं अभी भी ये सोचने लगा था कि आखिर चाची रोज-रोज खीरे का करती क्या थी।

वो जा रही थी, तब मां ने उससे कहा: आ ना बैठ, कहां जा रही है?

चाची ने कहा कि: आप मां-बेटा बातें करो, मैं जाती हूं। घर पर काम बचा है।

और वो चली गई।

जब‌ से मैंने पिछली रात में मां को चोदा था, तब से हम एक-दूसरे के बहुत करीब आ गए थे।

मैंने चाची के जाने के बाद मां से पूछा-

मैं: ये चाची रोज खीरा लेकर जाती है, और करती क्या है उसका?

मां: अरे मैंने तुझे बताया था ना उसे खीरा खाना बहुत पसंद है। वो उसको इसी लिए लेकर जाती है।

मैं: मां कही ये खीरे को खाने की जगह कहीं और तो नहीं डालती?

मां: चुप पागल! वो ऐसी नहीं है। वो बहुत सीधी और अच्छी औरत है।

मैं: अब ये तो देखने के बाद ही पता चलेगा, कि वो सीधी है या टेढ़ी है।

मैंने ये बात खत्म की, और मां से बोला: चलो मां एक बार और हो जाए, कोई नहीं है अभी, और मुझे भूख लग रही है।

मां मुझे मना करने लगी और बोलने लगी: पहले तू जाके नहा कर आजा। फिलहाल मुझे काम है, वो करने दे।

मैं: काम तो हमेशा करते रहते हो। आओ ये करले पहले।

मां नहीं बोल कर अंदर किचन में चली गई।‌‌ मैं अंदर उनके पीछे-पीछे गया, और पीछे से उनकी कमर को पकड़ लिया।

मां: छोड़ कोई आ जायेगा।

मैं: कौन आएगा इस वक्त?

मां: तेरी चाची आती-जाती रहती है।

मैं: वो तो आके चली गई उनको छोड़ो ना।

मैंने मां की नाभी में अपनी उंगली डाल दी, और उसमें उंगली फिराने लगा था। और अपने लंड को पैंट के अंदर से मां के चूतड़ में रगड़ने लगा था।

मां खुद को छुड़ाने का नाटक कर रही थी।‌फिर मैं झट से नीचे झुक कर बैठ गया, और मां के आगे आकर उनकी साड़ी को ऊपर किया, और मां की साड़ी के अंदर घुस गया। फिर मैं उनकी पैंटी को हटा कर उनकी चूत चाटने लगा।

मां मेरा सिर पकड़ कर अपनी चूत में डाले जा रही थी।‌‌ मैंने उनकी चूत में उंगली डाल दी, और जोर-जोर से अंदर-बाहर करने लगा था, और चाटने भी लगा था।

मेरी मां की चूत पूरी गीली हो गई थी। मां को मजा आ रहा था, और वो गरम होने लगी, और अपने मुंह से ओह आह की आवाजें निकाल रही थी,

वो बोल रही थी: अब अंदर ही रहेगा या बाहर भी आएगा?

मैं उनकी चूत को चांटे जा रहा था। फिर थोड़ी देर बाद मैं साड़ी के अंदर से बाहर निकला, और उनको बाहों में भर लिया।

मैंने उनकी साड़ी उपर उठाई, और सीधा अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया, और उनको दीवार में टिका कर उनके एक पैर को मेरे कंधे में उठा के, उनको जोर-जोर से चोदे जा रहा था। उनकी चूत की खुशबू आज दूर से ही आने लगी थी।

फिर मैंने मां से कहा: मीनाक्षी तुम्हारी चूत से अलग ही टाइप की खुशबू आ रही है।

मीनाक्षी: तू चुप हो जा, और बस मुझे जोर से चोद कर जल्दी मेरा पानी बाहर निकाल।

मैंने उनको चूत में उंगली फिराने को बोला। मैं उनकी चूत मारे जा रहा था। उनकी चूत से ठप ठप फप फाप की आवाज आ रही थी। फिर मैंने अपनी गति को बढ़ाया, और उनको गांड़ फाड़ चोदने लगा। मैं काफी देर से चोदे जा रहा था, और हम दोनों पसीने से भीग चुके थे।

मां बोली: मेरे पैरो को नीचे कर दे, ऐसे उठे-उठे दर्द करने लगे है।

फिर मैंने उनको प्लेटफॉर्म में बैठाया, और उनकी चूत में फिर से अपना लंड डाल कर चोदे जा रहा था। उनका बदन पूरा हिलने लगा था, और उसके साथ उनके दूध भी हिलने लगे थे।

मैं उनको एक हाथ से पकड़ कर चूसने लगा, और एक तरफ उनकी चूत को चोदे जा रहा था। थोड़ी देर बाद हम दोनों ने चुदाई खत्म की, और मैंने मां की चूत में अपना वीर्य छोड़ दिया। फिर एक-दूसरे को होंठो में चूम कर अलग हुए।

मां: अब जा जल्दी नहा ले, रात से चोद-चोद कर थक चुका है।

मैं: मैं आपको चोदने के लिए कभी नहीं थकता मीनाक्षी।

मां: हां, अब जा वर्ना तुझे जाने नहीं दूंगी।

मैं नहाने चला गया, और वो भी किचन में करके नहाने चली गई।

मैं जब भी मां को अकेले देखता, तो बस उनको पकड़ कर चोदने लग जाता था। वो मना नहीं करती थी, क्योंकि वो पूरी तरह से मेरी हो चुकी थी।

वो रोज रात को पापा के सोने के बाद मेरे रूम में मुझसे चुदाने आ जाती थी। आंधी आए या तूफान,‌ मैं उनको चोद कर ही रहता था। मैं और मां एक-दूसरे में घुल चुके थे

मैं उनको मजाक-मजाक में हर बार कहता था: चल मीनाक्षी, हम दोनों चुपके से शादी कर लेते है। किसी को पता नहीं चलेगा और तुम मेरे नाम का सिंदूर जीवन भर लगाती रहना।

वो हमेशा हस कर टाल देती थी।‌ समय बीतता जा रहा था और ऐसे करते-करते 12 दिन हो गए। कुछ दिनों बाद मेरे जाने के दिन आ गए थे।

एक दिन हमें पूरे परिवार के साथ शादी में जाना था।

मां ने मुझे बताया: आज हमे शादी में जाना है, रात को तू तैयार रहना।

मैं: मां आप लोग चले जाओ, मुझे नहीं जाना।

मां: जाना पड़ेगा बेटा, हम लोग ही किसी के घर की शादी में नहीं जायेंगे, तो हमारे घर की शादी में कौन आएगा?

मैं: मैं शादी ही नहीं करूंगा किसी से, तो किसी को मेरी शादी में क्यों बुलाना?

मां: तो क्या जिंदगी भर कुंवारा ही रहेगा?

मैं: मैं कहा कुंवारा रहूंगा? तुम हो ना, तुमसे शादी कर लूंगा।

मां: हां और मुझे ही चोद कर अपने बच्चो की मां बनाएगा, हैना?

मैं: वो भी चलेगा।

मां: फिलहाल तू ये सब बातें छोड़। तुझे रात में चलना होगा।

मैं: ठीक है मैं चलूंगा।

रात होने को आई। हम सब शादी में जाने के लिए रेडी हो गए थे। मां ने जोरदार गुलाबी कलर की साड़ी पहन रखी थी, और वो जोरदार माल लग रही थी। उनके भारी-भरकम शरीर से जवानी टपकती ही रहती थी।

मैं उनके पास गया और बोला: मीनाक्षी तू तो पूरी आज मेरी माल लग रही है।

उसने हस कर कहा: हां तेरी ही तो माल हूं, तो अच्छी कैसे नहीं दिखूंगी।

हम सब तैयार होकर बाहर गेट में ताला लगा कर बाहर आए। तभी

चाची-चाचा और प्रियंका भी ऊपर से नीचे आ रहे थे। मैं चाची को देखता ही रह गया।

उन्होंने आज सिल्वर कलर की साड़ी, बैकलेस ब्लाउस ब्लैक कलर का, और अपने पेट में गोल्ड की वेस्ट चैन (करधनी) पहनी थी। उनका वो भरा हुआ पेट और उनकी नाभी मुझे साफ-साफ दिखने लगी थी। वो तो आज मां से भी जादा हॉट लग रही थी।

मैंने कभी उनको ऐसी नजरों से नहीं देखा था। मेरा ध्यान तो हमेशा मां की मटकती गांड में ही रहता था। तो कभी उनकी ओर मेरा ध्यान ही नहीं गया।

अब मैं अपने चाची को घूरे जा रहा था। वो नीचे उतरी, और मैं दूर खड़ा था। फिर वो मुझसे आकर बोली-

चाची: आंखे सेंक ली हो तो चले मेरे छोटे उस्ताद?

मैं चुप हो गया एक-दम से।

मैंने चाची को तारीफ करते हुए बोला: चाची आज आप हूर की पारी लग रही हो।

चाची: अच्छा, तूने आज तक तो ये बात नहीं कही, फिर आज कैसे?

मैं: वो क्या है कि आप पहले ऐसे तैयार होकर आए ही नहीं मेरे सामने, तो कभी लगा नहीं।

चाची: अच्छा, लगता है अब रोज तेरे लिए तैयार होकर आना पड़ेगा।

चाची ने जिस टोन में ये बात कही, मुझे ऐसा लगने लगा कि वो जान-बूझ कर मुझे छेड़ने के लिए ऐसा बोल रही थी। मैंने मां के सामने दोनो की तारीफ की।

मै: आज तो आप दोनों बेहद खूबसूरत दिख रहे हो। ऐसा लग रहा है मानो आप दोनो जुड़वा बहनें हो।

वो दोनों हसने लगी।

फिर चाचा ने कार निकाली, और बोला: अब चलें?

हम लोग कार में बैठने लगे।

हमारे पास महिंद्रा स्कॉर्पियो थी उस वक्त। तो पापा और चाचा सामने बैठ गए, प्रियंका और अनीता दोनो साथ पीछे बैठेंगे बोल दिया।

फिर मैं मां और चाची बीच वाली सीट में बैठ गए।

मां बीच में बैठी और मैं एक तरफ की विंडो सीट में तो चाची दूसरी तरफ की विंडो सीट में बैठी थी।

हम शादी में जाने के लिए निकल गए। मैं रास्ते भर मां के चूतड़ों में हाथ डालते गया।

कार में सब साथ बैठे थे, तो उन्होंने कुछ नहीं बोला, बस मुझे कभी-कभी हाथ हटाने का इशारा करती थी।

कार में अंधेरा होने के कारण किसी को कुछ झांट पता नहीं चला।

हम शादी में पहुंच गए, और वहा जा कर खाना शुरु किया। मां और चाची एक तरफ, दोनों बहने एक तरफ, और पापा और चाचा का पता नहीं था। मैं अकेले खाना खा रहा था। मेरी नज़रें हमेशा मेरी मां को ढूंढती रहती, तो कभी चाची को। मैं अलग होकर खाना खा रहा था।

इतने में चाची मेरे पास आई और कहने लगी: किसे ढूंढ रही है मेरे हीरो की आंखें?

मैंने पलट के देखा तो चाची थी।

मैं: किसी को नहीं चाची, मां को देख रहा था कहां है करके।

चाची: अच्छा मुझे लगा किसी लड़की को ढूंढ रहा है।

मैं: अरे नहीं चाची, ऐसा नहीं है।

चाची: कभी मां से नज़रे हटा कर हमे भी देख लिया कर ( तिरछी नजरों से)।

मैं: बिल्कुल चाची ( और स्माइल दे दिया)।

चाची ने मेरी प्लेट खाली देखी तो मेरी प्लेट में अपनी थाली से रसगुल्ला उठा कर रख दिया और बोली-

चाची: तूने रसगुल्ला नहीं लिया है, ले तू अपनी चाची का रसगुल्ला खा।

और बोल कर वो कुछ लाने चली गई। मैं देख रहा था कि चाची कैसे बार-बार जान-बूझ कर मेरे करीब आ रही थी और तिरछी नजरों से बात करती थी। मुझे अजीब सी भावना उनके लिए आने लगी।

हम सब ने अपना खाना खत्म किया, और पार्टी में गिफ्ट देकर वापस आने को निकल गए। सेम वही सीट थी हमारी। मैं फिर से मां की चूतड़ों को मसलते हुए घर आया। हम सब लोग घर पहुंच गए थे।

हम सब अपने घर की ओर जाने लगे।

रात हुई और मां पापा के कमरे से मेरे कमरे में आ गई। मैंने मां को चोदना शुरू किया। पर आज उनको चोदते-चोदते मेरे दिमाग में वो चाची की बाते और चाची का गोरा बदन ही घूम रहा था।

मां मुझसे बोली: क्या हुआ मेरे लाल, क्या सोच रहा है?

मैं: कुछ नहीं मीनाक्षी।

मां: अच्छा।

फिर मैंने मां का मूड खराब करना ठीक नहीं समझा, और मां के ऊपर हबशी जैसे बरस कर चोदने लगा।

मां: आज मेरी चूत फाड़ डालेगा क्या?

मैं: मेरी चूत है, मैं इसे फाड़ू या चोदूं।

मां: अच्छा मेरे लाल, जोर से कर अब।

मैं मां को दरिंदो की तरह रात में 3 बजे तक चोदता रहा।

मां और मैं साथ-साथ झड़ते थे एक-दूसरे के ऊपर। मां की चूदाई के बाद वो अपने कमरे में चली गई। पर मैं अब भी चाची की वो बाते और उनका फिगर याद कर रहा था कि क्या माल लग रही थी वो करके।

उनके बॉडी शेप बूब्स 38″ कमर 33″ और गांड 46″ की थी।‌क्या कमाल का फिगर था उनका भी। मैं उनके बारे में सोचते-सोचते सो गया। सुबह मैं जल्दी उठा आज, और नींद ना आने के कारण मैं छत पर चला गया। सुबह‌ के 6 बजे थे। वहा गया तो चाची योगा कर रही थी योगा ड्रेस में।

मैंने उनको देखा, और सीढ़ियों के पास ही उनको देखने के लिए रुक गया, और थोड़ा झिझका भी था कि वो फिर से मुझे देख कर कुछ ना बोले करके।

उन्होंने मुझे देख लिया, और मुझे आवाज देकर बोली-

चाची: वहां अगर छुप कर देखोगे, तो वहा से कुछ नहीं मिलेगा।

मैं: मैं तो बस अभी आया हूं चाची।

चाची: तो आजा, और चाची के साथ योग कर ले।

मैं छत पर चला गया, लेकिन उनके पास नहीं गया।‌

मैंने बोला उनको: आप योगा करो, मैं छत पर टहल लेता हूं।

चाची: हा और टहलते हुए सब कुछ देख लेना।

मैं: क्या? क्या मतलब है आपका?

चाची के मुंह से ये बात अचानक से निकल गई।

वो कहने लगी-

चाची: कुछ नहीं,‌ तू टहल, मैं योगा कर लेती हूं।

मैं चाची को बीच-बीच में घूम कर देख रहा था थोड़ा-थोड़ा। वो जब अपने हाथों को ऊपर उठाती, और अपनी ब्रेस्ट को फ्लेक्स करती, तो उनके दोनों दूध हिलने लगते थे, मानो वो नाच रहे हो। और जब वो नीचे झुकती, तो उनके चूतड़ बड़े और कामुक लगते थे। मन तो करता था उनकी योगा ड्रेस फाड़ कर उनकी चूत में अपना लंड डाल दूं, पर ऐसा करना ठीक नहीं समझा मैंने।

फिर चाची ने योगा खत्म किया, और नीचे जा रहीं थी। जाते-जाते मुझसे कहने लगी-

चाची: चल तू भी नीचे, तेरे लिए मैं मस्त सी चाय बना देती हूं।

मैं: नहीं चाची, मैं बाद में पी लूंगा।

चाची: क्यों तुझे तेरी मां का ही सब कुछ अच्छा लगता है क्या?

मैं: ऐसा नहीं है चाची, अब चलो आप बोल रहे हो तो क्यों नहीं पियूंगा।

मैं उनके साथ नीचे उनके घर गया। वो मेरे लिए अंदर चाय बना रही थी। वो मेरे लिए चाय बना कर लाती है और बैठ गई मेरे सामने आके। मैं अपनी नज़रें नीचे करके चाय पीने लगा, पर उनके वो दोनों दूध मेरी आंखों में चुभ रहे थे।

उन्होंने लोवर इतना टाइट पहना था कि मुझे उनकी चूत का शेप आसानी से दिख रहा था। उनकी चूत बड़ी मोटी दिख रही थी।

मैं एक पल के लिए भी वो नजारा हटते नहीं देखना चाहता था। पर क्या करूं, चाची को ऐसे देख भी नहीं पाता था अच्छे से, तांकि फिर से ना कुछ बोले इसलिए।

हम दोनों ने अपनी चाय खत्म की, और मैंने बोला: मैं अब मैं जाता हूं चाची, फिर आऊंगा जल्दी ही आपके दीदार करने।

चाची: क्या बोला तूने जरा फिर से बोल?

मैं: कुछ नहीं चाची, मैंने बोला जल्दी आता हूं आपसे मिलने।

चाची: अच्छी बात है। तेरा अपने घर में हमेशा स्वागत है।

और उन्होंने मुझे स्माइल दी, और मैंने भी दी, और मैं वापस घर आ गया।

वापस आया तो मां फ्रेश हो कर आई थी, और समान ठीक कर रहीं थी। इतने में मैंने उनको पीछे से पकड़ कर अपनी ओर किया, और उनके होंठों में किस करके उनको गुड मॉर्निंग बोला।

मां: क्या बात है, आज मेरा लाल बड़ी जल्दी उठ गया?

मैं: हा मां सुबह अचानक मेरी नींद खुली तो मैं सीधे ऊपर छत पे टहलने चला गया।

मां: ठीक हैं, तू बैठ मैं चाय लेकर आती हूं।

मैं: नहीं मां, मैं चाची के घर से पीकर आ गया हूं,

और नहीं पियूंगा।

मां: ठीक है।

मेरी जल्दी नींद खुलने के कारण मुझे बहुत जोर की नींद आने लगी, और मैं वही सोफे में सो गया। मेरी थोड़ी देर बाद किसी की हसने की आवाज के कारण नींद खुली। मैंने देखा की अनीता और प्रियंका दोनों बाते करते हुए हस रहे थे।

अनीता और प्रियंका दोनो एक कॉलेज में एक ही क्लास में पढ़ते थे, इसलिए वो बहन होने के साथ-साथ दोस्त भी थे।

मैंने उसने कहा: क्यों रे, आज तुम लोगो का कॉलेज नहीं है क्या?

अनीता: आपका कॉलेज रविवार के दिन भी लगता है क्या?

मैं: ओह, आज रविवार है क्या!

मैं जब से छुट्टियों में आया था, दिन का पता ही नहीं चलता था, किस दिन Sunday है और किस दिन Monday है।

प्रियंका: भईया आप यहां सोए थे आज?

मैं: अरे नहीं प्रियंका, मेरी आज जल्दी सुबह नींद खुल गई थी। इसलिए मैं छत में घूमने चला गया था। वहां से आने के बाद सोफे में कब नींद पड़ी मुझे याद भी नहीं।

मैं उनकी बकवास नहीं सुनना चाहता था, इसलिए मैं नहाने चला गया। मैं सुबह का चाची की ये बड़ी गांड और बूब्स का नजारा याद करके मुठ मारने लगा।

मैं सोंच रहा था कि मैं अपनी मां को तो चोद ही चुका था, क्यों ना चाची को भी चोदने के लिए अपने जाल में फसा लिया जाए। लेकिन ये होता कैसे, जैसे-तैसे तो मां फसी थी।लेकिन चाची को कैसे चोदा जाए इसके लिए मैं सही वक्त और मौके का इंतजार करने लगा।

आज रविवार था और घर पर सब लोग थे।‌ मैं घर पर बोर हो रहा था। घर पर सब लोगों के होने के कारण मैं आज सुबह से एक बार भी नहीं चोद पाया था मां‌ को। एक तो ये दोनो बहनें घर पर थी, ऊपर से पापा भी, तो कोई भी मौका नहीं बन पा रहा था।

मैं मां के रूम में गया, और उनके पास बैठ गया। वो पापा से बातें कर रही थी। मैंने पीछे से उनके चूतड़ों पर हाथ रखा, तो उन्होंने गुस्से से दूर हटा दिया।

मैंने मां से बोला: आज मुझे बोर लग रहा है मां घर पर।

मां: तो बाहर जा कही घूम कर आजा, ठीक लगेगा।

मैं: आप भी चलो ना मेरे साथ, कंपनी मिलेगी।

मां: मैं नहीं जाऊंगी, आज के ही दिन तो मुझे रेस्ट मिलता है।

मैं: फिर मैं भी अकेले बाहर जाकर क्या करूंगा?

मां: तेरे यहां स्कूल के दोस्त है, उनके यहां चले जा।

मैं: वो लोग घर पर है भी या नहीं पता नहीं, कैसे चला जाऊ?

मां: तो तू चाची के यहां चले जा, वही गप्पे लगा लेना।

मैं: अच्छा ठीक है।

मैं चाची को फिर से देखना तो चाहता था, लेकिन उनकी तिरछी बातों के कारण मन नहीं कर रहा था। पर मैंने सोचा यहां बोर होने से अच्छा उनकी तिरछी बात सुन लूंगा।

फिर मैं उनके घर चला गया।

दरवाजा अंदर से बंद था। मैंने बेल बजाई, पर शायद वो सो रहे हो, इसलिए दरवाजा नहीं खोल रहे थे। मैंने दोबारा बेल बजाई। आखिरकार ने दरवाजा खुला, और मेरे तो होश उड़ गए।

अब आगे की कहानी अगले पार्ट में।

आप मुझे मेरे ईमेल आईडी में मेसेज करके अपना फीडबैक दे, कि कैसी लगी मेरी कहानी।

nutankashyap78612@gmail.com

 

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