Site icon Desi Kahani

सर्दी की एक रात माँ के साथ। (Sardi ki ek raat maa ke sath)

हेल्लो दोस्तों, मैं मनीष, 22 वर्ष का अच्छी बॉडी वाला लड़का हूं। मेरी आकर्षक बॉडी लड़कियों और भाभियों को खूब आकर्षित करती है। लेकिन मैं अपनी बॉडी किसी विशेष के लिए बचा के रखता हूं।

मेरे घर में माँ-पापा, छोटे भाई और बहन है। दोनों अभी स्कूल जाते है, और पापा अपने काम के सिलसिले में कभी घर तो कभी बाहर रहते है। मम्मी का नाम सुनीता है। वह एक हाउसवाइफ है और घर को संभालने के साथ खुद को भी मेंटेन रखती है। 40 की होने के वावजूद भी अभी 30 की लगती है। उनकी गोरे बदन पर आगे चूचियों और पीछे गांड की उभार लोगों में आक्रोश पैदा कर देती है। उनकी कातिल फिगर 36-32-36 है।

मुझे माँ बहुत अच्छी लगती है। चूंकि वह मेरी माँ है, इसलिए मैं अपनी भावनाओ को नियंत्रित रखता हूं। लेकिन यदि माँ खुद मुझे अपना बना ले, तो मैं भी पीछे नहीं हटूँगा।

बात पिछली सर्दी की है, जब मेरे दोनों भाई-बहन नानी के यहां गये थे, और पापा उसी दिन किसी काम से 1 हफ्ते के लिए बाहर चले गये। घर पर मैं और माँ ही थे। उस दिन सर्दी इतनी ज्यादा थी कि हम लोग जल्द ही खाना खा कर अपने कमरे में सोने चले गये।

रात के 11 बजे के करीब मेरे कमरे को किसी ने खटखटाया, मैंने दरवाजा खोला तो सामने माँ खड़ी थी।

मैं: माँ आप इस वक्त क्या हुआ?

मम्मी: कुछ नहीं आज ठंड ज्यादा है और नींद भी नहीं आ रही है, तो सोची कि तुम्हारे साथ कुछ देर बात कर लूं। अगर तुम्हें एतराज ना हो तो…!

मैं: मम्मी भला मुझे क्यूं एतराज होगा? आइये अंदर, वैसे भी आज नींद मुझे भी नहीं आ रही है।

मम्मी और मैं एक बेड पर एक कम्बल में घुस गये। आज मेरी खुशियों का ठिकाना ना रहा।

मम्मी: वैसे तुम्हे नींद क्यूं नहीं आ रही है?

मैं: जैसे आपको नहीं आ रही है वैसे ही!

मम्मी: अच्छा मुझे ठंड के करण नींद नहीं आ रही है। तुम्हारे पापा के साथ उनकी बाहों में अच्छी नींद आ जाति थी। लेकिन वो तो हफ्ते भर के लिए बाहर चले गये और दोनों बच्चे भी नहीं है।

मैं: मुझे तो बस ऐसे ही नींद नहीं आ रही है मम्मी। लेकिन आप चाहो तो आप मेरी बाहों में गर्म हो कर सो सकती हो।

(बचपन में माँ मुझे अक्सर अपनी बाहों में कस के सुलाती थी।)

बस इतना कहना ही था कि माँ मेरी बाहों में आ गयी। उनके गर्म बदन ने मेरे बदन में करंट दौड़ा दिया। उनकी सांसे गर्म होने लगी। फिर माँ ने कहा-

मम्मी: बेटा, तुम्हे याद है बचपन में मैं तेरे दोनों पैरों को अपने पैरों में चाप कर गर्म करती थी?

मैं: हां मम्मी, आज भी करो ना!

फिर मैंने अपना दोनों पैर माँ के पैरों के बीच में डाल दिया। माँ एक पतली नाईटी पहनी थी जो घुटनो तक थी, उनकी जांघो के बीच मेरे पैर जाते ही गर्म हो गये और लंड अलग तूफान मचाने लगा। मेरा लंड पूरा तन चुका था, और शायद माँ को भी महसूस हो रहा था। माँ जान-बूझ कर मुझे अपने से टाइट चिपका रही थी। उनकी गर्म सांसे कम्बल को गर्म कर दी। मेरा हाथ स्वतः ही उनकी पीठ पर चलने लगा।

माँ भी मेरे बाल को सहला रही थी। उनकी सांसों की गर्मी मेरे चेहरे पर महसूस हो रही थी। मन कर रहा था कि अभी इनकी गुलाबी होंठों को चूम लूं। लेकिन मम्मी अपने होंठों को मेरे गाल के पास हौले हौले सहला रही थी, जिससे मुझे भरपुर आनंद प्राप्त हो रहा था।

अब मुझसे बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था। मैं अपने हाथ को नीचे उनकी गांड पर ले गया और होंठ उनके होंठ से लगा दिया। हम दोनों कुछ देर इसी तरह थम गये। हमारी गर्म सांसे आपस में टकरा रही थी। उनकी मुलायम होंठ मेरा लंड की गर्मी बढ़ा रही थी जिससे मेरा लंड कपड़े के ऊपर से ही उनकी चूत को ठोक रहा था।

मैंने धीरे से उनकी एक होंठ को अपने होंठों से दबाया और चूसने लगा। माँ भी मेरा साथ देने लगी। फिर हम दोनों एक-दूसरे में गुंथ गये और होंठों को पीने लगे। थोड़ी देर तक होंठों को चूसने के बाद मैंने उनकी कपड़े कम्बल के अंदर ही निकलने लगा।

उफ्फ्फफ्फ्फ़ क्या मुलायम और गर्म बदन है मम्मी का। मैं भी अपने कपड़े निकाला और नंगा हो गया। हम दोनों कम्बल ने नंगे एक-दूसरे में गूंथे हुए थे। मेरा लंड मम्मी के गीली चूत के ऊपर से चूम रहा था। हम दोनों इतने गर्म हो चुके थे कि अब सर्दी गायब हि हो चुकी थी। कम्बल के भीतर ही मैं उनकी मुलायम चूचियों को चूसने लगा। मम्मी मस्त आआह्ह्ह… उउउउफ्फफ्फ्फ़… करने लगी। मेरा लंड माँ के चूत पर फिसल रहा था।

फिर मैं नीचे गया और उनकी नमकीन चूत को चूसने लगा। माँ की चूत किसी आग की भठ्ठी की तरह जल रही थी। मैंने कुछ देर तक उनकी चूत चूसने के बाद अपना लंड माँ के चूत पर सेट कर दिया। फिर माँ के ऊपर लेटा और धीरे से धक्का देकर अपना लंड माँ के चूत में उतरने लगा।

माँ के मुह से मादक सिसकारी निकलने लगी उउउउउउउफ्फ्फ्फ़ आहाह्ह्ह्ह बेटा ह्ह्ह्ह… मैं उनकी चूचियों को मुह में भर के चूसते हुए अपना कमर हिलाने लगा। माँ लगातार अपनी कमर उठा कर मेरे धक्कों का जवाब दे रही थी।

मम्मी की चूत पूरी गीली हो चुकी थी। मेरा लंड उनकी चूत में तेजी से अंदर-बाहर हो रहा था। आज पहली बार मुझे इतनी मस्त मजेदार माल चोदने को मिला। आआह्ह्ह्ह आज सर्दी में माँ ने जो गर्मी दी वह गजब का एहसास है। मैं तेजी से माँ की चूत को चोदने लगा। माँ भी खूब मजे से गांड उठा कर चुद रही थी। उनकी चूत लगातार पानी छोड़ कर गिल्ली हो रही थी।

मैं भी अब झड़ने वाला था। कम्बल के अंदर हम दोनों चूत चुदाई का तांडव कर रहे थे, माँ और मेरी गर्म सासों से कम्बल के अंदर बहुत गर्मी बढ़ गयी थी, लेकिन हमारी चुदाई नॉनस्टॉप हो रही थी। तभी माँ मुझे कस के अपनी बाहों में दबाने लगी और मुझे जोर से चोदने को कहने लगी। मैं फुल रफ़्तार में था। थोड़ी देर में हम दोनों ने एक साथ पानी छोड़ा और इस सर्दी को गर्म बना दिया। हमारी साँसे बहुत तेज चल रही थी। माँ अभी भी मुझे अपने बाहों में पकड़ी हुई थी।

हम दोनों थक चुके थे, हमारी साँसे अब थोड़ी धीमे हो रही थी। मैंने कम्बल को चेहरे के पास से हटाया, उउउफ्फ्फ़ माँ का गोरा चेहरा पसीने से चमक रहा था। उनकी खूबसूरत चेहरे को फिर से चूमने लगा। माँ भी मेरा साथ देने लगी। हम दोनों एक-दूसरे को चूमते हुए नंगे ही सो गये।

सुबह जब नींद खुली तो अभी भी मैं माँ से नंगा चिपका हुआ था। मम्मी मुझे अपनी बाहो में लेके सो रही थी, उनका प्यारा सा चेहरा मुझे बहुत क्यूट लग रहा था। उसी वक्त मम्मी ने भी अपनी आँखे खोली और बड़े प्यार से मुझे किस्स की और अपने कपड़े पहन कर बाथरूम में चली गयी। मैंने भी अपनी कपड़े पहनने लगा, क्यूंकि आज भी ठंड बहुत ज्यादा थी।

Exit mobile version