Nayi Dagar, Naye Humsafar – Episode 22

This story is part of a series:

जोसफ द्वारा भेजा वीडियो देखने के बाद मैं ठगा सा महसूस कर रही थी। ये साफ़ हो गया कि राहुल ने मुझे बिस्तर तक लाने के लिये मुझे धोखा दिया था।

मैंने अपने कपडे पहनना शरू कर दिया। मुझे जल्दी से यहाँ से निकलना था। कपडे पहनते वक्त मैं सोच रही थी काश मैंने ये वीडियो कल रात को ही देख लिया होता तो राहुल मेरे जिस्म के साथ खिलवाड़ नहीं कर पाता।

उससे भी पहले मुझे अपना फ़ोन स्विच ऑफ नहीं करना था। वरना मैं इस पार्टी में आती ही नहीं। जोसफ ने तो मुझे बचाने की कोशिश की थी।

शायद उस दिन फार्म हाउस पर वो जो इशारे कर रहा था वो इसी साजिश की तरफ थे, मैं ही मुर्ख समझ नहीं पायी और उसको गलत समझती रही।

सच में दिखावे पर नहीं जाना चाहिए था। जोसफ भले ही खतरनाक दीखता हो पर उसका दिल साफ़ हैं, जबकि राहुल सुन्दर होते हुए भी दिल का काला हैं। मेरे जैक के साथ रिश्ते के बारे में जोसफ ने सैंड्रा को नहीं बताया होगा, ये भी सैंड्रा को राहुल ने ही बताया होगा अपनी साजिश को अंजाम देने के लिए।

मैंने कपड़े पहन लिए थे और मोबाइल वापिस पर्स में रख सैंडल पहन लिए। मैं जाने को तैयार थी और राहुल बाथरूम से बिना कपड़ो के बाहर निकला।

राहुल: “अरे कपड़े पहन लिए, अभी तो काम बाकी हैं डिअर”

मैंने अपना मोबाइल निकाल वीडियो चलाया और उसकी तरफ स्क्रीन कर दी।

मैं: “ये देखो, तुम्हारी काली करतूत रिकॉर्ड हैं।”

राहुल: “सॉरी प्रतिमा। मेरी बात सुनो, मैं समझाता हूँ तुम्हे”

मैं: “जितना सुनना था सुन लिया ”

राहुल: “पर ये पूरा सच नहीं हैं। मुझे पूरी बात बताने का मौका तो दो”

मैं अब बैडरूम से बाहर आ गयी और अपना मोबाइल वापिस पर्स में डाल दिया, वो मेरे पीछे पीछे आया और मुझे रोकने की कोशिश करने लगा। वो दौड़ कर मेरे आगे आया और बाहर जाने वाले दरवाजे को रोक कर खड़ा हो गया।

राहुल: “सिर्फ दो मिनट दो, मैं तुम्हे पूरी बात बताता हूँ, फिर तुम फैसला करना मैं गलत हु या नहीं”

मैं वापिस पीछे मुड़ी और हॉल के उस दरवाजे से बाहर निकली जो बालकनी में खुलता हैं। वो फिर मेरे पीछे पीछे आया रोकने को। मैं बालकनी में आकर उसके आगे बनी सीढ़ियों से नीचे गार्डन की तरफ उतरी। सीढ़िया उतरने के बाद उसने पीछे से आकर मेरा हाथ पकड़ लिया। मैंने उससे अपना हाथ छुड़ाया। उसने फिर मेरे कंधे से मेरा पर्स उतार लिया और अपने पीछे कर लिया।

राहुल: ‘पहले तुम मेरी बात पूरी सुनो फिर मैं तुमको पर्स दूंगा। फिर चाहे तो तुम चली जाना। आई रियली लव यु ”

वो बिना कपड़ो के वहां खड़ा था और मुझे शर्म आ रही थी कि इसके फार्म हाउस का केयरटेकर ये तमाशा देखेगा तो क्या सोचेगा। मैंने अपना पर्स लिए बिना ही वहां से जाने का सोच लिया और चल पड़ी। थोड़ा आगे आकर उसने एक बार फिर मेरा हाथ पकड़ लिया, मैं छुड़ाने का प्रयास करने लगी और वो मुझसे रुकने की गुजारिश करता रहा।

इस खींचातानी में मेरा हाथ दर्द करने लगा और मैं चीखी कि मुझे दर्द हो रहा हैं और उसने मुझे छोड़ दिया। मैं इसके लिए तैयार नहीं थी और पीछे की तरफ दम लगाने के कारण मैं तेजी से पीछे की तरफ गयी और लड़खड़ा कर पास में बने स्वीमिंग पूल में गिर गयी।

मेरा सर पानी के अंदर चला गया। मैं पूल के ज्यादा गहराई वाली जगह थी और मुझे इतना अच्छा तैरना नहीं आता खास तौर से जब मेरे पुरे कपड़े भीग गए हो और साड़ी पेटीकोट पहना था जो भीग कर मेरे शरीर से चिपक गए थे । मगर जल्द ही राहुल भी पूल में कूद पड़ा और मुझे पीछे से पकड़ कर खड़ा हो गया। उसने मुझे जमीन से थोड़ा ऊपर उठा रखा था।

वो मुझे ऐसे ही उठाये थोड़ा आगे लेकर आया जहा पूल का पानी थोड़ा कम गहरा था। उसने मुझे नीचे उतार पैर जमीन पर टिकाये और मेरी सलामती पूछने लगा।

उसने मुझे अभी भी पकड़े रखा था। मैंने उसको धक्का दिया और पूल की सीढ़ियों की तरफ भागी बाहर आने को। पर मेरी साड़ी खींची और मैं रुक गयी।

मैंने पलट कर देखा उसके हाथ में मेरी साड़ी का पल्लू था, शायद धक्का देते वक्त उसके हाथ में आ गया था। मैंने उसको साड़ी छोड़ने को बोला पर वो मुझे रुकने के लिए बोलने लगा और मेरी तरफ बढ़ा।

मैंने अपनी साड़ी जल्दी से पेटीकोट से अलग की और आगे बढ़ी। मेरी पूरी साड़ी पेटीकोट से अलग हो गयी और मैं पूल की सीढ़ी से ऊपर चढ़ गयी और पूल से बाहर आयी। मगर उसने पूल में खड़े खड़े ही मेरा एक पाँव पकड़ लिया और जाने नहीं दिया।

मैं वही बैठ गयी और अपना पाँव झटक कर छुड़ाने लगी पर उसने नहीं छोड़ा। मैंने मदद के लिए देखा, उसका केयरटेकर जहां रहता था वहा ताला लगा था, शायद उसने उसको कल रात को ही छुट्टी दे दी थी ताकि मेरे साथ रात गुजार पाए। अब सीढ़ी से चढ़ वो भी बाहर आ गया।

बाहर आते ही उसने मेरा पाँव छोड़ा और मुझे अपनी बात सुनाना चाहा पर मैं उठ कर फिर भागी अपने पर्स की तरफ। वो मेरे पीछे ही था।

अपने भीगे कपड़ो में मैं बहुत असहज महसूस कर रही थी। मैं जैसे ही अपने पर्स को उठाने के लिए झुकी उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया। मैं वही औंधे मुँह गिर पड़ी और वो मेरे ऊपर। उसने मुझे सीधा किया और अपनी बात सुनानी चाही पर मैं उसपर चीखते हुए हटाती रही।

अपनी बात सुनाने के लिए उसे मुझे कमजोर करना बहुत जरुरी था और उसे मेरी कमजोरी अब तक पता चल गयी थी। उसने मेरा गीला पेटीकोट नीचे से थोड़ा ऊपर उठाया और अपना हाथ अंदर डाल मेरी पैंटी खींच कर बाहर निकालने लगा।

मैंने उसको रोकना चाहा पर कामयाब नहीं हुई और उसने मेरी पैंटी थोड़ी नीचे खिसका दी और अपनी एक ऊँगली मेरी चूत में घुसा दी।

अंदर ऊँगली जाते ही उसने ऊँगली को अंदर गोल गोल घुमा अंदर बाहर करने लगा। जैसे एक रोते हुए बच्चे के मुँह में निप्पल डाल उसको शांत करा देते हैं वैसे ही उसकी ऊँगली के मेरी चूत में हरकत होते ही मेरा चिल्लाना बंद हो गया और हलकी सिसकियाँ निकलने लगी।

उससे अच्छे से पता था मुझे नियंत्रण करने की चाबी कहा हैं और वो मेरी चाबी घुमा कर मुझे नशा दे रहा था । एक हाथ से मेरा कंधा दबाये उसका चेहरा मेरे चेहरे के पास था।

राहुल: “आई एम सॉरी इसके लिए पर मैं ऐसा नहीं करता तो तुम मेरी बात नहीं सुनती। अब सुनो ”

मेरे सर पर नशा चढ़ रहा था और मैं उसकी बात नहीं सुनना चाहती थी। मुझे कुछ नहीं सुझा और अपने होंठो से उसको होंठो को काटना चाहा पर उसके होंठ पर छूते ही उसने मुझे चूमना शुरू कर दिया। मैं कुछ ना कर पायी और नीचे चूत में होती हलचल के साथ ही मैं खुद भी उसको चूमने लगी। थोड़ी देर तक हम एक दूसरे को यु ही चूमते रहे फिर उसने मुझे कहना शुरू किया ।

राहुल: “मैं मानता हु की मैंने तुम्हे पाने के लिए गलत तरीका इस्तेमाल किया था पर मैं तुम्हे प्यार करता हु। पता नहीं जोसफ ने तुम्हे पूरा वीडियो भेजा या नहीं पर तुमने जो सुना वो आधा सच हैं ”

मैं: “अहह मुझे नहीं सुनना उम्म अहह अहह ”

उसने अपनी ऊँगली निकाल दी। किसी बैटरी से चलने वाले खिलौने की बैटरी निकाल दी हो वैसे मेरी सिसकियाँ शांत हो गयी पर उस हलके नशे में अभी भी पड़ी थी।

उसने मेरी पैंटी पूरी निकाल दी और आगे से पेटीकोट कमर तक ऊपर कर दिया। वो मेरे ऊपर चढ़ गया और अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया। पतली ऊँगली के बाद उसके मोटे लंड के मेरी चूत के अंदर जाते ही मेरा नशा और बढ़ गया।

इसके बाद उसने एक के बाद एक जोर के धक्के मारना शुरू कर दिया और मैं अपने हाथ दोनों तरफ फैलाये आहें भरने के अलावा कुछ नहीं कर पायी।

थोड़ी देर मुझे वही खुले में चोदते हुए वो अपनी सफाई दिए जा रहा था कि वो मुझे बहुत प्यार करता हैं और मैं उसकी गलती को पहली गलती मान उसे माफ़ कर दू।

मेरे पति ने तो सिर्फ मजे के लिए मुझे अपने दोस्तों को सौंप दिया था इसने तो मुझे दुसरो के हाथों में जाने से बचाया ही था । मुझे उसके प्यार पर कभी शक नहीं था और उसकी आँखों में सच्चाई दिख रही थी पर मैं उसके धोखे को कैसे भुला देती। तभी मेरे मोबाइल की घंटी सुनाई दी जो पर्स के अंदर से आ रही थी।

मैंने अपना हाथ पीछे बढ़ा कर पर्स को अपनी तरफ खिंचा और अंदर से मोबाइल निकाला।

अशोक का कॉल था, मुझे सुबह घर पहुंचना था और अभी मैं इस मुसीबत में फंसी थी। राहुल मेरे सीने से उठा और बिना अपना लंड बाहर निकाले मेरी टाँगे अपनी मुड़ी जांघो पर रख दी और बैठे बैठे ही बहुत धीमे धक्के मारता रहा ताकि मैं बात कर पाऊ।

अशोक किसी से मिलने जाने वाला था और मेरा इंतजार कर रहा था ताकि मैं बच्चे को संभाल सकू। मेरे कपड़े पुरे गीले हो चुके थे और इस तरह जा नहीं सकती थी तो मैंने उसको एक दो घंटे में आने का बोल कर बच्चे को माँजी के पास छोड़ने को बोल दिया। फिर मैंने फ़ोन रख दिया और उस पर चिल्लाने लगी ।

मैं: “तुम्हे सिर्फ मेरा जिस्म चाहिए था ना, तो ले लो, जो चाहिए ले लो”

ये कहते हुए मैंने अपने ब्लाउज के हुक खोल दिए और ब्लाउज को सामने से हटा कर ब्रा को उसके सामने कर दिया। अपने ब्रा को भी हटाने की कोशिश की पर पीठ पर हुक लगे होने से नहीं खिसका पायी। उसने अब तक मुझे धीमे धक्के मारने भी बंद कर दिये थे। मैंने अपने हाथ फिर जमीन पर फैला दिए।

मैं: “बोलो क्या चाहिए तुम्हे? लेलो कुछ नहीं कहूंगी। तुम इसी के भूखे हो, कर दो नंगा मुझे”

उसने मेरे कंधे पकड़ मुझे ऊपर उठाया और मेरा गीला ब्लाउज मेरे कंधे से निकाल पूरा बाहर कर दिया और हाथ पीछे ले जाकर मेरे ब्रा का हुक खोल दिया। मेरी तो रोने जैसी हालत थी। वो सच में मुझे नंगा कर रहा था। उसने मेरा ब्रा पूरा निकाल मुझे टॉपलेस कर दिया। मैं लगभग सुबकते हुए फिर लेट गयी।

उसने अब मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोला और अपना लंड मेरी चूत से निकाल दिया। फिर उसने मेरा गीला पेटीकोट मेरी टांगो से निकाल मुझे पूरा नंगा कर दिया। वो उठ गया और मैं वही लेटी रही।वो वापिस पीछे की तरफ गया और पूल में हाथ डाल वहा तैर रही मेरी साड़ी अपने हाथों में समेट कर ले आया। वापिस आकर उसने मेरे बाकि के कपड़े उठाये।

राहुल: “मैं ड्रायर में डाल कर कपड़े सूखा देता हूँ, फिर तुम्हे घर छोड़ दूंगा”

ये कह कर वो वहा से घर के अंदर चला गया। मैं पूरी नंगी वहा लेटी की लेटी रह गयी। मैं उसको समझ ही नहीं पा रही थी। मेरा शरीर पाने के लिए उसने मुझे धोखा दिया और अभी उसके पास मौका था तो उसने कुछ नहीं किया। पता नहीं उसका असली रूप क्या हैं।

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