Site icon Desi Kahani

Drishyam, ek chudai ki kahani-35

पति से दिल भर जाये गर दूजा मन को भाये,
आजा प्यारे पास हमारे काहे घबराये, काहे घबराये?

मैंने जवाब दिया, ” आपके पति ने मेरे बारे में जो अच्छे शब्द कहे उसके लिए मैं उनका आभारी हूँ। ठीक है, आप चिंता मत कीजिये। सब ठीक होगा। मैं आपको सही मार्गदर्शन दूंगा। इसके लिए मुझे आपसे कुछ सवाल पूछने होंगे। पर इसके पहले आप मेरे बारे में जो चाहें मुझसे पूछ सकती हैं।”

आरती ने पूछा, “आप क्या करते हैं, कहाँ रहते हैं, आप की उम्र क्या हैं और आपका मेरे पति अर्जुन से कहाँ और कैसे परिचय हुआ?”

मैंने जवाब दिया, “मेरा नाम राज है, मैं एक उम्रदराज वरिष्ठ नागरिक (सीनियर सिटीजन) हूँ। अब इस उम्र में मुझे स्वयं कोई सेक्स बगैरह करने की इच्छा नहीं है। पर मैं चाहता हूँ की युवा युवती अपने साथीदार की संवेदनाओं का सम्मान रखते हुए ऊपर वाले की जो देन है वह सेक्स का भरपूर आनंद लें और अपने जीवन को खुशहाल बनाएं। मैं एक लेखक हूँ। मैं हमारे रोजमर्रा निजी जीवन में घटती गोपनीय सच्ची घटनाओं को कहानियों के रूप में लिखता हूँ। मेरी कहानियों के कुछ प्रखर प्रशंशक भी हैं और अर्जुन उनमें से एक है। इसी माध्यम से मेरी और अर्जुन की पहचान भी हुई थी।”

आरती और मेरे बिच मेरे इस सन्देश के बाद कई और संदेशों के आदान प्रदान में और एक दूसरे की जान पहचान में कुछ दिन बीत गए। धीरे धीरे आरती का मुझमें विश्वास बढ़ने लगा। मैं आरती से सवाल पूछता गया और वह मुझे अपने जीवन की घटनाओं के बारे में बताती गयी। आरती की जीवनी के रहस्य परत दर परत खुलते गए। कई ऐसी घटनाएं जो उसने किसी से शेयर नहीं की थीं वह मुझसे शेयर करने लगी। उनमें ज्यादातर बातें तो अर्जुन ने मुझे पहले ही बतादी थीं। पर उसके अलावा और कई चीजें जैसे आरती का कमल के साथ लगभग चुदवाना और उस समय की उसकी मनोदशा वह सब आरती ने बड़े संजीदगी से मुझे बताया।

इन आदान प्रदान से आरती को शायद मुझ पर और मेरी परिपक्वता और व्यवहारिक दूरदर्शिता पर काफी दृढ विश्वास पैदा हो चुका था। मैं भी आरती को अपनी बेटी समान समझ कर उसे सही सलाह देता था। इन संदेशों के आदानप्रदान में मेरी यही कोशिश रहती थी की आरती और अर्जुन का दाम्पत्य जीवन और अधिक सुदृढ़ और आनंदमय रहते हुए वह दोनों अपनी कामुक कामनाओं की पूर्ति कर सकें और जातीय विविधता सुख का भरपूर आनंद उठा सकें।

कुछ दिनों से मेरी आरती से बात नहीं हो रही थी। मुझे अर्जुन बार बार पूछता रहता था की क्या प्रोग्रेस है? क्या मेरी आरती से कुछ बात होती है या नहीं? मैंने उसे बताया की कुछ दिनों से आरती से बात नहीं हो पायी थी। अर्जुन ने आरती से कहा की वह मुझसे बात करे।

उसी दिन शामको आरती का मेसेज आया, “हाई !”

मैंने भी जवाब में “हाई” किया तो आरती ने लिखा, “पिछले कुछ दिनों से घर में कुछ गेस्ट रिश्तेदार आये थे तो बिज़ी रही और कांटेक्ट कर नहीं पायी।”

मैंने पूछा, “रमेशजी के मेसेज आ रहे हैं?”

आरती ने कहा, “मेसेज? अरे एक नहीं पिछले हफ्ते में कम से कम बीस पच्चीस से भी ज्यादा मैसेजिस आ गए होंगे। पर मैं काम में व्यस्त थी सो जवाब नहीं दिया। वैसे भी मेरा मन नहीं कर रहा जवाब देने का, क्यों की वह बार बार यही दोहरा रहें हैं की वह मुझसे बहुत प्यार करते हैं और वह मेरे बगैर रह नहीं सकते…

रमेश जी ने तो यहाँ तक लिखा है की उनके दोस्त सब कहते हैं की आरती भाभी को घर ले आओ। यह बड़ा पागलपन है। अरे, मैं कोई भेड़ बकरी हूँ की मुझे जो जहां चाहे ले जाए? मैं शादी शुदा हूँ। मेरा अपना घर है। पर मैं क्या करूँ? मेरे अपने पति इस आग को हवा दे रहे हैं…

मैंने तय किया था की थोड़ी फारिग हो कर रमेशजी को ऐसा डंडा लगाउंगी, मतलब ऐसा जवाब दूंगी की वह सब कुछ लिखना बंद कर देंगे।

मैं उनको कहूँगी की अगर उन्होंने इस तरह मेरा पीछा करना शुरू किया तो मैं पुलिस में शिकायत कर दूंगी, फिर वह जेल में चक्की पिसते रहेंगे। फिर मैंने सोचा, क्यों ना मैं आप से पहले बात करूँ फिर ठीक लगा तो जवाब दूंगी।”

मैंने आरती से पूछा, “देखो बेटा, तुम मुझे ना सिर्फ अपना निजी समझो पर मुझे अपना अन्तरंग दोस्त समझो। अन्तरंग का मतलब समझती हो तुम?” मैंने पूछा।

आरती ने जब कुछ देर तक कोई जवाब नहीं लिखा तो मैंने लिखा, “अन्तरंग का मतलब होता है अंतर का अंग। मतलब वह इंसान जिसको अन्तर की हर बात बतानी चाहिए। कोई भी बात कितनी भी गुह्य हो, छिपानी नहीं चाहिए। क्या तुम मुझे अपना अन्तरंग दोस्त समझती हो? अगर हाँ, तो कहो की तुम मुझसे अपने अंतरात्मा की कोई भी बात नहीं छिपाओगी, चाहे कितनी ही नाजुक या गुप्त क्यों ना हो और मुझ पर पूरा विश्वास करोगी।”

आरती ने फ़ौरन जवाब दिया, “विश्वास तो आप पर मुझे पूरा पहले से ही है। मैं आपको ना सिर्फ अंतरंग दोस्त बल्कि अपना खुदका रूप जैसे मानती हूँ, मैं वादा करती हूँ की मैं मेरे मन की कोई भी बात आप से छिपाऊंगी नहीं।”

मैंने पूछा, “तो सच्चे दिल से यह बताओ की रमेशजी तुम्हें कैसे लगते हैं?”

सामने से आरती का कुछ समय तक जवाब नहीं आया तो मैंने लिखा, “हेलो?”

आरती ने जवाब दिया, “अंकल मैं आपके सवाल के बारे में गहराई से सोच रही थी। आपसे मैं कुछ भी छिपाऊंगी नहीं। हालांकि मैं रमेशजी से मिली तो नहीं पर मुझे रमेशजी एक निहायत ही शरीफ और अच्छे इंसान लगते हैं। उन्होंने मुझसे अपनी कोई भी बात चाहे अच्छी हो या बुरी, नहीं छिपाई। पर रमेशजी दिमाग चाटने वाले इंसान हैं। वह पता नहीं मुझसे इतना प्यार करने लगे हैं की मैं तंग आ गयी हूँ…

अब मेरे पास या तो उनका दिल तोड़ने का या फिर उनसे रिश्ता जोड़ने के अलावा और कोई चारा नहीं है। उनसे रिश्ता कैसे जोड़ सकती हूँ? मैं शादीशुदा हूँ, मेरा अपना घर है, पति है, समाज में इज्जत है। इस लिए मुझे अब उनका यह भ्रम तोड़ना पडेगा की मैं परे पति को छोड़ कर उनसे रिश्ता जोड़ सकती हूँ।”

आरती रमेशजी को धीरे धीरे पसंद करने लगी थी। आरती को रमेशजी की सादगी, उनका उत्कट प्यार, उनका अपनापन और उनका अपने सभी जानने वालों के बारे में बात कर उनके फोटो दिखा कर आरती से उनका परिचय करवाना बहुत अच्छा लगा। रमेशजी ने आरती को बताया की उन्होंने सब जानपहचान वालों को आरती की फोटो दिखा कर यह तक कह दिया था की वह आरती से शादी करने वाले हैं…

यह बात यहां तक आगे बढ़ गयी थी की रमेशजी के दोस्त और भाई भाभी सब आरती को भाभी के नाम से बुलाने लगे थे। रमेशजी कोई कोई बार आरती से उनके दोस्तों से बात भी करा देते थे। ऐसा करते करते रमेश अंकल से रमेशजी कब बन गए आरती को भी पता नहीं चला।

मैं समझ गया की आरती वाकई में तंग आ गयी थी की वह करे तो क्या करे? एक तरफ से रमेश जी का बार बार आरती को प्रेम जताना, दूसरी तरफ पति का आग्रह की आरती रमेशजी से बात करे। अगर यह स्थिति को सम्हाला नहीं तो हो सकता था की आरती एक ही झटके में अर्जुन की तीन साल की मेहनत पर पानी फेर देगी। मैंने लिखा, “आरती, थोड़ा रुको और मेरे एक सवाल का जवाब सच सच देना।”

आरती, “हुंम्म”

मैंने लिखा, “देखो बेटा, मैंने कई महिलाओं को जाना है समझा है। पुरुष की तरह ही हर स्त्री में भी सेक्स की बड़ी तेज भूख होती है। पर स्त्री समाज और इज्जत के डर से उस भूख को दबा देती है। सही है या गलत?”

आरती, “सही है अंकल। हर स्त्री में यह भूख होती है। मेरी मामी में भी यह भूख थी और झूठ क्यों कहूं मुझमें भी यह भूख है। मैं झूठ नहीं बोलूंगी।”

मैंने लिखा, “आरती अब तुम और मैं एक दूसरे से सामने खुल गए हैं। मैं चाहता हूँ की हमारे बिच में यह औपचारिकता का पर्दा ना रहे। क्या तुम यह मानती हो?”

आरती, “क्या बात करते हो अंकल? मैं आपसे सारी बातें खुल कर ही तो कर रही हूँ।”

मैंने कहा, “हाँ सही है पर तुम मुझसे कभी एकदम खुल कर बात नहीं करती। जैसे अभी तुमने कहा मुझे भी भूख है। मैं चाहता हूँ की तुम यह कहो की मुझे भी चुदवाने की भूख है।”

आरती ने कुछ रुक कर लिखा, “क्या अंकल? मुझसे इतना क्यों खुलवाते हो? मुझे शरम आती है। पर मैं कोशिश करुँगी। धीरे धीरे जरूर यह शब्द प्रयोग करने की कोशिश करुँगी। पर आप भी तो अंग्रेजी शब्द सेक्स लिखते हो।”

मैंने कहा, “ठीक है। अब से मैं शुद्ध देसी शब्दों का ही प्रयोग करूंगा। तुम भी कोशिश करना।”

आरती, “ओके।”

मैंने पूछा, “रमेश का स्वभाव तुम्हें अच्छा लगता है यह तो तुमने लिखा, पर यह कहो की रमेश से चुदवाने के बारे में तुम्हारा क्या ख़याल है?”

सामने से आरती का कुछ देर तक कोई जवाब नहीं आया। फिर आरती ने एक ही वाक्य लिखा, “अंकल, पता नहीं।”

मैंने फिर पूछा, “इस का क्या मतलब है?”

आरती, “अंकल, आपने यह सवाल एकदम सीधा पूछा, मेरी समझ में नहीं आता की मैं क्या बताऊँ?”

मैंने लिखा, “कोई बात नहीं। जवाब ना देते हुए भी आपने जवाब दे ही दिया। देखो बेटा, हर जवान वीर्यवान मर्द और चुदाई में सक्रीय और शारीरिक रूप से सक्षम हर औरत को चुदाई में विविधता की कामना होती ही है। हर औरत को स्मार्ट पराया मर्द अच्छा तो लगता है। उसके मन में यह भाव आ ही जाता है की वह पलंग में कैसा होगा? वह कैसे प्यार करता होगा? वह कैसे चोदता होगा? कैसे चूमता होगा…

कैसे मेरे अंगों को चाटेगा? ऐसे कई सवाल हर औरत के जहन में उठते ही रहते हैं। और यह अस्वाभाविक भी नहीं है। समाज और इज्जत के डर से मर्द या औरत इस मामले में आगे बढ़ने से कतराते हैं। अगर तुम्हारे मन में यह ख्याल आता है तो बेटी यह मत समझो की यह ख्याल गंदा और बुरा है…

ऐसा ख्याल आना साबित करता है की तुम एक साधारण स्वस्थ औरत हो। हर मर्द चाहता है की वह अलग अलग औरतों को चोदे। वैसे ही हर औरत भी अपने अंदर दिल की गहराई से चाहती है की वह भी मर्दों की तरह अलग अलग व्यक्ति से शारीरिक सम्बन्ध बनाये मतलब अलग अलग मर्दों से चुदवाये। देखो बेटी आज बिलकुल सच बोलना। क्या मैं गलत कह रहा हूँ?”

आरती, “नहीं अंकल, आपकी बात तो सच है पर……..”

मैंने कहा, “कोई पर बर नहीं। सच्चाई का सामना करो। अगर मेरी बात सच है तो। अब और सुनो। इस मामले में आगे बढ़ने से पहले हर औरत के मन में सबसे पहले और सबसे बड़ा सवाल आता है पति का। पति क्या सोचेगा? पति क्या कहेगा? अगर पति को पता चल गया तो? अगर यह बात जाहिर हो गयी तो समाज में बदनामी होगी। बगैरह बगैरह। यह सोच कर औरतें अपनी इस वासना को दबा कर अपने दिल में ही गाड़ देती हैं…

जिनकी चुदवाने की भूख हद से बढ़ जाती है और अगर उन्हें मौक़ा मिलता है तो वह पति से छिपकर चोरी से दूसरे मर्द से मिलती हैं और उनसे चुदवाती हैं। पर यहां तुम्हारी बात उलटी है। यहां तो तुम्हारा पति ही तुमसे कह रहा है की तुम किसी दूसरे मर्द से चुदवाओ। तो फिर पति की नजर से गिरने का और समाज से डरने का तो सवाल ही नहीं है।”

उस समय अगर मैं आरती के सामने होता तो आरती के चेहरे के भाव देखने का मजा ही कुछ और होता। मेरी बात सुनकर आरती के चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगी थीं। उसे जबरदस्त सच का सामना करना था। आरती ने बड़े भोलेपन से पूछा, “अंकल, आप भी ना! आप भी मेरे पति और रमेशजी को सपोर्ट करने लग गए।”

पढ़ते रहिये, यह कहानी आगे जारी रहेगी..

iloveall1944@gmail.com

Exit mobile version